समानता की परिभाषा,अर्थ एवं समानता का प्रकार

 समानता (Equality)

हमारे देश में ही नही बल्कि पुरे विश्व में समानता का अभाव हमेशा ही रहा है, जिस प्रकार हाथ की सभी अंगुलियाँ समान नहीं हैं, उसी प्रकार मनुष्य एक-दूसरे के समान नहीं है | वे स्वभाव, बुध्दि, शक्ति तथा क्षमता के अधार पर परस्पर असमान होते है | जिस प्रकार समानता प्राकृतिक है, उसी प्रकार और समानता में प्राकृतिक है |   “ एक दृष्टि से सभी मनुष्य समान है किंतु दूसरी दृष्टि से वे सभी असमान है |“ 


समानता की परिभाषा अर्थ एवं समानता का प्रकार


   मनुष्य स्वभाव तथा क्षमता के दृष्टिकोण से असमान है इस मान्यता को लेकर ही हम समानता के सही अर्थ का विश्लेषण कर सकते हैं | राजनीतिशास्त्र के अंतर्गत समानता का एक विशेष अर्थ में प्रयोग किया जाता है | यहाँ समानता का अभिप्राय ऐसी परिस्थितियो के अस्तित्व से हैं, जिनके कारण सभी व्यक्तियों को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए समान अवसर प्राप्त हो सके और जिनके द्वारा व्यक्तित्व के विकास के मार्ग में रुकावट करने वाली बाधाओं तथा सामाजिक एवं आर्थिक विषमताओं को दूर किया जा सके | 


समानता की परिभाषा,अर्थ एवं समानता का प्रकार

 समानता का सही अर्थ है समाज या राज्य में विशेष सुविधाओं का अभाव राज्य की दृष्टि में सभी व्यक्ति समान है| अमीर-गरीब, उच्च-नीच आदि का भेद असमानता का परिचय हैं | राज्य को धर्म, जाति, लिंग, वंश, धन आदि के आधार पर नागरिकों के बीच किसी प्रकार का भेद नहीं करना चाहिए | सबको अपने विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध होना चाहिए तथा किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष को विशेषाधिकार या विशेषत सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए  | समाज के धन तथा उत्पादन का इस प्रकार से न्यायोचित वितरण होना चाहिए कि समाज के किसी एक वर्ग के पास धन इकट्ठा ना हो जाए  | राज्य के पदों एवं सेवाओं में सबको प्रवेश करने का समान अवसर प्राप्त होना चाहिए या अन्य सुविधाएं सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त होने चाहिए |  समानता का दूसरा दृशदरिस यह भी है कि राज्य सुविधाओं का अभाव अद्वितीय सभी नागरिकों के लिए समान अवसर प्रदान किया जाना चाहिए |

समाज में प्रत्येक व्यक्ति को योग्यता के आधार पर किसी प्रकार का पद सेवा मिलनी चाहिए |  लोकतंत्र के दोआधार है राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक समानता स्वतंत्रता और समानता के संबंध में लोकतंत्र की सफलता निर्भर करती है |  हम समानता पर जोर नहीं दिया जाता है तो व्यक्ति और समाज दोनों का विकास रुक जाएगा  | राज्य समाज में मनुष्य को उसकी योग्यता के अनुसार सुविधा अधिकार या अवसर का दिया जाना सही रूप में समानता है  | स्वतंत्रता की भांति समानता का अर्थ भी नकारात्मक और सकारात्मक रूप से लिया जाता है |


इसके अतिरिक्त कई विद्वानों ने इसे अपनी बुद्धिमता के आधार पर अलग-अलग रूप से परिभाषित किया है :-

बार्कर (Barker) के अनुसार - के अनुसार समानता का आशय उस स्थिति से है जिसमें मुझे जो अधिकार प्राप्त है वह दूसरों को भी उसी रूप में मिले तथा जो अधिकार अन्य नागरिकों को प्राप्त है वह मुझे भी प्राप्त हो।

लोसकी के मतानुसार – समानता का अर्थ या नहीं होता कि प्रत्येक व्यक्ति को एक जैसा व्यवहार किया जाएगा प्रत्येक व्यक्ति को समान वेतन दिया जाए यदि एक मजदूर का वेतन प्रश्न वैज्ञानिक एक गणितज्ञ के बराबर कर दिया जाए तो इससे समाज और देश नष्ट हो जाएगा इसलिए समानता कर दिया होगा कि कोई भी विशेष अधिकार वाला वर्ग नहीं रहता था सबको विकास के लिए समान अवसर प्रदान किया जाए|


समानता के विभिन्न प्रकार (Different forms of Equality) :- 

समानता के कई प्रकार अथवा कई रूप है समानता की आवश्यकता के आधार पर इसे कई प्रकारों में वर्णित किया गया है |


1. नागरिक समानता :-

नागरिक से समानता का अर्थ है की नागरिकों को राज्य की ओर से कुछ नागरिक अधिकार प्रदान किए जाते हैं | हम इन अधिकारों के प्रयोग के लिए नागरिकों को समान अवसर दिया जाना नागरिक समानता है |  कानून की दृष्टि में सभी नागरिक सम्मान है इसीलिए राज्य को सभी नागरिकों के प्रति सम्मान बर्ताव रखना चाहिए  |  संपूर्ण राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक प्रकार का कानून हो तथा सबको नागरिक अधिकारों का उपयोग करने का सामान अवसर मिलना चाहिए संक्षेप में, नागरिक समानता से अभिप्राय है कि राज्य धर्म, जाति, वर्ग, लिंग के आधार पर नागरिको  के बीच किसी भी प्रकार का विभेद नहीं करें तथा किसी नागरिकों को मौलिक अधिकारों का उपयोग करने का समान अवसर मिले |  जिससे नागरिकों के मन में राज्य के प्रति विश्वास की भावना जागृत हो सके एवं विधि के शासन की स्थापना द्वारा नागरिक समानता को स्थापित किया जा सकता है |  


2. सामाजिक समानता (Social Equality):-


समाज व्यक्तियों को कहा जाता है | समाज के सभी सदस्यों के सहयोग से ही समाज का विकास हो सकता है | अतः यह आवश्यक है कि समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समान दृष्टि से देखा जाए तथा समाज में उसे दूसरे सदस्यों के साथ बराबरी का स्थान दिया जाता | समाज अपने सदस्यों को जो अधिकार या सुविधाएं देता है, उसके प्रयोग में किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं किया जाना चाहिए | समाज में धर्म, लिंग, जाति, जन्मस्थान, वंश, धर्म आदि के आधार पर अगर किसी प्रकार का भेदभाव या पक्षपात नहीं किया जाता, तो वह सामाजिक समानता की स्थिति है |  भारतवर्ष में जाति प्रथा अस्पृश्यता अमेरिका और अफ्रीका के कुछ देशों में रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है|  भेदभाव के कारण समाज का विकास रुक जाता है, सभ्यता  और संस्कृति पिछड़े मार्गों पर चली जाती है | जाति-प्रथा तथा अस्पृश्यता की बुराइयों को रोकने के उद्देश्य से भारत में संविधान निर्माताओं ने संविधान में सामाजिक समानता संबंध व्यवस्थाएं रखी है संविधान में अस्पृश्यता को अवैध करार दिया गया है  |  हमारे संविधान संस्कृतिक समानता हेतु मौलिक अधिकारों को प्रावधान करता है |  


3.राजनीतिक  समानता (political Equality):-

राजनीतिक समानता से तात्पर्य ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का पूर्ण अधिकार है  |  राजकीय कार्यों में भाग लेने के निमित्त उपलब्ध समान अवसर को राजनीतिक समानता कहा जाता है, लोकतंत्र जनता के शासन व्यवस्था है शासन कार्य में सभी नागरिकों को समान रूप से भाग लेने का अवसर या  अधिकार प्राप्त हो |  राजनीतिक समानता के इस स्थिति में प्रत्येक नागरिकों को किसी भी पद के लिए निर्वाचित होने, मतदान करने, सरकारी नौकरी प्राप्त करने और सरकारी कार्यों की आलोचना करने का समान अवसर प्राप्त होता है  |  धर्म, जाति, लिंग, जन्म, स्थान, वंश आदि के आधार पर नागरिकों के बीच राजनीतिक अधिकारों के संबंध में किसी प्रकार का भेदभाव या पक्षपात नहीं होना चाहिए क्योंकि राजनीतिक समानता शासन व्यवस्था की सफलता के लिए एक आवश्यक  शर्त है   |  राजनीतिक समानता की प्रजातंत्र के मुख्य आधारशिला है इसका उदाहरण मतदान करना व चुनाव लड़ना है  |  


4.आर्थिक समानता (Economic Equality):-

आर्थिक समानता का तात्पर्य अधिक धन कमाने से ना होकर मनुष्य की आवश्यकता पूर्ति से हम आर्थिक समानता का यह अर्थ नहीं है, कि सभी के पास बराबर धन उपलब्ध हो बल्कि इसका अर्थ यह है कि संपत्ति और धन का उचित वितरण हो जिसमें समाज के किसी एक वर्ग के हाथ में सारा धन अथवा सारी संपत्ति जमा ना हो जाए इससे समानता का अर्थ लगाया जा सकता कि सभी व्यक्तियों के पास संपत्ति तथा समान धन हो किंतु यह संभव नहीं है साम्यवादी देशों में भी इस सीमा का आर्थिक समानता की स्थापना नहीं की जा सकी है  |  आर्थिक समानता का सही अर्थ यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को धन कमाने तथा रोजगार प्राप्त करने का समान अवसर प्राप्त हो, समाज में धन का वितरण इस प्रकार से किया जाए कि किसी एक वर्ग के हाथ में सभी धन इकट्ठा ना हो जाए, समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की प्रारंभिक आवश्यकताओं  की पूर्ति करना राज्य का अनिवार्य कार्य है |ऐसा ना हो कि कुछ व्यक्तियों के के पास बहुत मात्रा में संपत्ति हो अधिकांश व्यक्ति निर्धन असहाय हो प्रोफेशर लॉस्की  ने कहा है, “कुछ लोगों के पास प्रचुर मात्रा में धन होने के पहले सब की आवश्यकताएं अच्छी तरह पूरी हो जाएंगे” उदाहरण के लिए मुझे मक्खन और पर एक खाने का कोई हक नहीं है अगर मेरे पड़ोसी को दोनों वक्त रोटी नसीब नहीं हो रही है|

  आर्थिक समानता लोकतंत्र की सफलता की एक अनिवार्य शर्त है इस बारे में मैथ्यू आरनार्ल्ड ने कहा, “हम आज समानता धनिक वर्ग को वैभव देती है मध्यवर्ग को बुरा बनाती है तथा निम्न वर्ग को असभ्य बबर्र बनाती |”


5.प्राकृतिक समानता (Natural Equality):-

प्राकृतिक समानता का अर्थ है कि मनुष्य का जन्म समान होता है प्राकृतिक ने सबको समान बनाया है इस प्रकार सभी व्यक्ति जन्म से समान होते हैं और उनमें कोई आज असमानता नही पाई जाती है लेकिन या विचारधारा पूर्ण रूप से उचित नहीं हो सकती हैं क्योंकि समाज में उपस्थित लोगों में काफी भिन्नता देखने को मिलती है मनुष्य असमान ही जन्म लेता है कोई लंबा, कोई नाटक, कोई गोरा, कोई काला कोई फुल स्वास्थ्य कोई दुर्बल कोई मंद बुद्धि वाला तथा कोई तीसरा बुद्धि वाला व्यक्ति भी होता है अतः प्राकृतिक समानता एक काल्पनिक व्याख्या प्रतीत होती है अधिक से अधिक हमला कर सकते हैं कि सबको समान समझना चाहिए तथा जनजाति ना शिवलिंग आदि के आधार पर उनके बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए प्रत्येक व्यक्ति के साथ प्राकृतिक रूप से समान व्यवहार करना चाहिए । 


समानता के आधारभूत तत्व

  • सभी लोगों के विकास के लिए समान अवसर प्राप्त हो एवं समाज व राज्य सभी लोगों के साथ समान आचरण का व्यवहार करें ।
  • सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करना ही समानता है | 
  • मानवीय गरिमा तथा अधिकारों को समान संरक्षण प्राप्त होना चाहिए ।
  • समाज में किसी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, भाषा, लिंग, निवास स्थान, सम्पति, राष्ट्रीयता आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाए ।
  • प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान महत्व दिया जाए ।


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